कमाल कैण्डी का (लघुकथा) - डॉ. कुमारी सोनी (सोनिया अनंत)
कड़ाके की ठंड थी। हर तरफ़ सर्द हवाएँ बह रही थीं। मैं अपने दफ़्तर से घर लौटने के लिए …
कड़ाके की ठंड थी। हर तरफ़ सर्द हवाएँ बह रही थीं। मैं अपने दफ़्तर से घर लौटने के लिए …
सड़क के किनारे कूड़े के ढेर पर बिखरे हैं कुछ दाने— अनाज के, जीवन के! साथ ही पड़ी है …
हे वीर सपूतों! तुमसे ही, आज़ाद है यह वतन। भारत माँ के रणबाँकुरो, शत-शत तुम्हें नमन! …
आज 31 जुलाई मुंशी प्रेमचंद जी की 146वीं जयंती है। लमही के जिस दीये ने 1880 में जन्म …
छायावाद के चार प्रमुख स्तंभों में से एक महादेवी वर्मा जी का साहित्य इतना अगाध है कि …
चश्मदीद गवाह था, या कोई हवा थी? किसने देखा था— हत्या, अत्याचार, प्रदर्शन, आकर्षण, आं…
सिर्फ स्त्री देह ही नहीं बंधी है रूढ़ियों की ज़ंजीरों में, पुरुष मन भी बंधा है! माता…
मेले में अब खिलौने खरीदे नहीं गए, मजबूर बाप देख के रोने नहीं गए। ज़ाहिर न हो कि चाहत…
संरक्षक एवं परामर्शदाता मण्डल प्रो. (डॉ.) छाया सिन्हा मुख्य संरक्षक हिन्दी विभाग (पूर्व संकाय…
पाँच-छह साल की उम्र में इंसान इतना अबोध होता है कि उसे अच्छे-बुरे को समझने का होश नह…
सर्वोपरि हैं गुरु यहाँ,दरस दिखाएँ सबको। परम्परा गुरु -शिष्य की ,वे समझाएँ सबको। …
दानपेटी सिर पर रखकर प्रधान पुजारी भगवान के द्वार पहुँचा। भगवान भक्त को देखकर नहीं बल…
बंधन को बंधन ही नहीं माना, तो मुक्ति की खोज मैं कैसे करती? मैं तो प्रतीक्षा की ऊ…
दिल में कोई अरमान रखना, हो दर्द भी तो मुस्कान रखना। मर जाएँगे अपने वतन के लिए, हिंदु…
भारतीय संस्कृति में गुरु को केवल एक शिक्षक नहीं, बल्कि साक्षात ब्रह्म का स्वरूप और ई…
अगर कर्म है सत्य सुहावन, तो किस्मत तक दासी है। हो व्यवहार समानांतर तो, आँगन मथुरा-का…
वर्षों तक वन में घूम-घूम, बाधा-विघ्नों को चूम-चूम, सह धूप-घाम, पानी-पत्थर, पांडव आये…
डॉ. प्रीति सुमन कला क्षेत्र की बहुप्रतिभाशाली व्यक्तित्व हैं। आप सृजन, अभिनय, निर्दे…
आज रचना अपने हॉस्टल की खिड़की पर बैठी अपलक बाहर हो रही वर्षा को निहार रही थी। सामने …
सहमे-सहमे हैं सर वाले, चारों तरफ़ हैं पत्थर वाले। प्यास की शिद्दत को क्या जानें, दरि…
श्रद्धा अर्पित इन चरणों में, प्रीत नमन करती। प्राणनाथ बन जाओ कान्हा, चरण सदा धरती॥ च…
हिंदी नाट्य-परंपरा में जयशंकर प्रसाद के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के पश्चात …
पीपर के छंइआ में जे संइआ जी बोलएलन, मीले नs अएलन हो, मीले नs अएलन। पीपर के......…
कितने रंग बदलते हो! तुम दुनिया को छलते हो। तुम सबसे ज्ञानी, सुलझे, खुशफहमी में पलते …
वर्षों पुरानी बात है। एक नदी के शांत और सुरम्य तट पर, जहाँ ढलते सूरज की किरणें पानी …
गरिमा सक्सेना हिंदी की कई विधाओं में एक साथ अपनी महत्वपूर्ण उपस्थिति दर्ज कर रही हैं…
किश्ती को जो डूबने से बचा सके, ऐसी पतवार चाहिए, जड़ें काट दे बुराई की, अच्छाई में…
कितना दिलकश हसीं नजारा है, साथ जब से मिला तुम्हारा है। ज़िक्र होता कहीं तुम्हारा है,…
जब आवत रहे सावन के पहला सोमवार, तब करत रहली धरती हरिहर सिंगार। मिली झूला झूलत रहली स…