चटकार दोहा( बज्जिका) -साधना कृष्ण
हाथरसी के भूल के, पढ़ दोहा चटकार। एक बेर फेनू भेल ,आज नवल अवतार।। बस अप्पन हो जयकार।…
हाथरसी के भूल के, पढ़ दोहा चटकार। एक बेर फेनू भेल ,आज नवल अवतार।। बस अप्पन हो जयकार।…
सैनिक मेरे देश के, जीवट के पर्याय, अपनी वीरता से लिखें, शौर्य का अध्याय। बन सरहद पर …
सावन से रोमानियत, सावन से है प्रीत, बूंदों की शहनाइयाँ, कुदरत का संगीत। सावन म…
1. हुई राधिका सुप्त, गुप्त बात पूछो तो क्या है? पावस का उल्लास, पास श्याम क्यों नहीं…
देश-प्रेम पर जाँ न्योछावर, कर मेरे मनमीत! जिसके हिय में दया नहीं है, वह क्या जाने प्…
प्यासी धरा मिथिला की, शुष्क हुई अबला-सी, सूख गए नदी-नाले, चिंता हुई जान की। लोग-बाग,…
सर्वोपरि हैं गुरु यहाँ,दरस दिखाएँ सबको। परम्परा गुरु -शिष्य की ,वे समझाएँ सबको। …
श्रद्धा अर्पित इन चरणों में, प्रीत नमन करती। प्राणनाथ बन जाओ कान्हा, चरण सदा धरती॥ च…
जन-जन में अति हर्ष, दर्श कर नभ मेघा घनघोर। शीतल हुई बयार, पपीहा दादुर करते शोर।। बिस…
कुछ हमें छोड़कर चले गए, कुछ को हमने भी छोड़ दिया। कुछ पद को पाकर मस्त हुए, हमको पद-अ…