बाप, बाप होता है(कहानी) - श्यामल बिहारी महतो
'आखिर उसने जो कहा, कर ही डाला।' मंच, मंच पर हमने नेताओं का रूप बदलते, पार्टी…
'आखिर उसने जो कहा, कर ही डाला।' मंच, मंच पर हमने नेताओं का रूप बदलते, पार्टी…
शाम के सात बजे थे। सूरज डूबने के बाद अंधेरा फैल चुका था। लोग अपने-अपने घरों को लौट र…
दिव्या खिड़की से बाहर तेज़ होती बारिश को टकटकी लगाए देखे जा रही थी। मानो एक तूफ़ान ब…
उर्दू और हिंदी ग़ज़ल साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर, सुप्रसिद्ध ग़ज़लकार श्री राजेन्द्र …
सुबह का समय था। बाहर से मेरे कुछ दोस्त आए हुए थे। कुछ खाने-पीने के बाद हम साथ बैठे च…
एक बार मैं और मेरे भैया मम्मी के साथ गर्मी की छुट्टियों में नानी के घर गए हुए थे। दो…
"मिलॉर्ड! दामिनी के तलाक़ की अर्ज़ी को ख़ारिज कर दिया जाए। इसका पति इसे अभी भी …
हर साल 14 सितंबर आता है, और हम सब बड़े उत्साह से हिन्दी दिवस मनाने लगते हैं। सेमिनार…
आज हिंदी दिवस है, जो हमें हमारी मातृभाषा हिंदी की गौरवपूर्ण धरोहर की याद दिलाता है। …
ज़िंदगी दुख-सुख और धूप-छाँव का खेल है। रात के बाद दिन निकलता है—यह शाश्वत सत्य है। ह…
सत्यनारायण हिंदी के महत्त्वपूर्ण गीतकार हैं। बिहार का राज्य-गीत उनके द्वारा रचा गया …
सुबह के सात बजे थे। हल्के बादलों के साथ बहती ठंडी हवाएँ मन को और तरो-ताज़ा कर रही थी…
“अरे मदना! कहाँ मर गया रे?” ट्रिंग... ट्रिंग... ट्रिंग... बॉस ने लगातार घंटी पर घंटी…
सुनीता के मायके में उसकी छोटी बहन की शादी थी। घर के सभी लोग आँगन में विवाह संपन्न हो…
बाज़ार में ख़रीदारी कर, रोड किनारे हाथ में हेलमेट पकड़े बाइक के सामने अभी खड़ा ही हु…
आरती की थाली मेज़ पर रखी थी। रोली की लालिमा अभी भाई के माथे पर ताज़ा थी। दीदी ने र…
भारतीय संस्कृति में गुरु की अवधारणा केवल एक व्यक्ति या उपाधि तक सीमित नहीं है, अपितु…
मथुरा, वृंदावन, गोकुल, नंदगाँव, बरसाने—चाहे ब्रजभूमि के किसी भी इलाके में चले जाइए, …
बाज़ार में खरीदारी कर, रोड किनारे हाथ में हेलमेट पकड़े बाइक के सामने अभी खड़ा ही हुआ…