मामा जी के पके बाल (लघुकथा) - डॉ. प्रीति सुमन
एक बार मैं और मेरे भैया मम्मी के साथ गर्मी की छुट्टियों में नानी के घर गए हुए थे। दो…
एक बार मैं और मेरे भैया मम्मी के साथ गर्मी की छुट्टियों में नानी के घर गए हुए थे। दो…
"मिलॉर्ड! दामिनी के तलाक़ की अर्ज़ी को ख़ारिज कर दिया जाए। इसका पति इसे अभी भी …
सुबह के सात बजे थे। हल्के बादलों के साथ बहती ठंडी हवाएँ मन को और तरो-ताज़ा कर रही थी…
“अरे मदना! कहाँ मर गया रे?” ट्रिंग... ट्रिंग... ट्रिंग... बॉस ने लगातार घंटी पर घंटी…
सुनीता के मायके में उसकी छोटी बहन की शादी थी। घर के सभी लोग आँगन में विवाह संपन्न हो…
बाज़ार में ख़रीदारी कर, रोड किनारे हाथ में हेलमेट पकड़े बाइक के सामने अभी खड़ा ही हु…
आरती की थाली मेज़ पर रखी थी। रोली की लालिमा अभी भाई के माथे पर ताज़ा थी। दीदी ने र…
आज कक्षा में सभी बच्चे बहुत खुश नज़र आ रहे थे। खुशी इस बात की थी कि अभी-अभी स्कूल मे…
"रश्मि, आज बहुत अच्छा मौका है। प्रगति मैदान में पुस्तक मेला लगा हुआ है। बहुत दि…
लाचार बूढ़े कुत्ते के पैर कुचलकर भाग रही कार को कुत्तों के झुंड ने बहुत दूर तक भौंकत…
पुस्तक खोलते ही एक कागज़ का टुकड़ा गिर पड़ा, जिस पर कुछ पंक्तियाँ लिखी थीं। न जाने क…
कमरे का दरवाज़ा ज़ोर से टकराया और रिया गुस्से में हाँपती हुई अंदर दाख़िल हुई। आँखों …
साँपों के सरदार ने एक आपातकालीन बैठक बुलाई। सरदार ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा, &quo…
पार्क की बेंच पर बैठे दादाजी ने मुस्कुराते हुए अपने पोते से कहा, "बेटा, ज़रा इध…
गाँव के तिराहे पर तीनों अचानक टकरा गए—तीनों तीन राह से। दाढ़ी, बहुरिया और दीपू। पति,…
कृष्णा और गोविंद बहुत अच्छे मित्र थे। गाँव की गुल्ली-डंडा से लेकर शहर के हॉस्टल में …
हिन्दी की एक प्रतिष्ठित कवयित्री एवं ग़ज़ल की शोधार्थी होने के कारण कई उर्दू के ग़…
सौम्या ने हाल ही में अपने जीवन के अठारह वर्ष पूरे कर उन्नीसवें वसंत में कदम रखा था। …
ज्यों ही रात के बारह बजे, रमेश जी ने पत्नी रमणी का माथा चूमते हुए ताली बजाना शुरू कर…
आख़िरकार बटुक बाबू को ज़मानत नहीं मिल पाई और पुलिस ने उन्हें गिरफ़्तार कर लिया। वह प…