बाप, बाप होता है(कहानी) - श्यामल बिहारी महतो
'आखिर उसने जो कहा, कर ही डाला।' मंच, मंच पर हमने नेताओं का रूप बदलते, पार्टी…
'आखिर उसने जो कहा, कर ही डाला।' मंच, मंच पर हमने नेताओं का रूप बदलते, पार्टी…
दिल्ली हो या जमुई या हाथरस, आजकल ऐसी घटनाएं जैसे आम हो गई हैं, जो बेहद शर्मनाक हैं। …
शाम के सात बजे थे। सूरज डूबने के बाद अंधेरा फैल चुका था। लोग अपने-अपने घरों को लौट र…
दिव्या खिड़की से बाहर तेज़ होती बारिश को टकटकी लगाए देखे जा रही थी। मानो एक तूफ़ान ब…
सुबह का समय था। बाहर से मेरे कुछ दोस्त आए हुए थे। कुछ खाने-पीने के बाद हम साथ बैठे च…
बाज़ार में खरीदारी कर, रोड किनारे हाथ में हेलमेट पकड़े बाइक के सामने अभी खड़ा ही हुआ…
बहुत समय पहले की बात है। एक समृद्ध राज्य पर एक बूढ़ा और अत्यंत घमंडी राजा शासन करता …
शालिनी खुशमिज़ाज और चंचल लड़की थी, जबकि सुनीता सुशील और शर्मीली थी। दोनों पुष्पेंद्र…
'माँ! मास्टर साहब कह रहे थे कि दो दिनों में फीस नहीं जमा की तो नाम काट दिया जाएग…
चमचमाते हाईवे के एक ओर बसा एक छोटा-सा गाँव है। पंचायत द्वारा बनवाई गई पक्की नालियाँ,…
वर्षों पुरानी बात है। एक नदी के शांत और सुरम्य तट पर, जहाँ ढलते सूरज की किरणें पानी …
बड़ी मिन्नत और मन्नतों के बाद रिंकू के बथान वाले केले के पेड़ में इस बार जो घवद (केल…
एकरूपता अक्सर जीवन को नीरस बना देती है। पैंतालीस की उम्र तक आते-आते रमेश का जीवन भी …