इंसानियत का अपने पतन कर रहे हैं(ग़ज़ल) - किशोर छिपेश्वर "सागर"
खा के मोटा अपना अब वो तन कर रहे हैं, हमने सुना है कि वो गबन कर रहे हैं। आते नहीं हैं…
खा के मोटा अपना अब वो तन कर रहे हैं, हमने सुना है कि वो गबन कर रहे हैं। आते नहीं हैं…
भाव घायल हुए, शब्द आते नहीं, इसलिए आज हम गीत गाते नहीं! जो थे अपने, वही अब पराए हुए,…
फिर सुबह हुई, दिनकर करता रहा इंतज़ार मेरे जगने का। मैं सोया रहा, वह बढ़ चला आलोक-पथ …
बूंद गिरी बरखा की पहली, बिफरी सी है थोड़ी पगली! म्यूजिक सिस्टम पे गज़ल चला, वही मीर,…
आज़ाद वतन की ख़ातिर वीरों ने प्राण गँवाये हमे याद है उनकी गाथा हम उनको भूल न पाये भारत…
हिन्दी की एक प्रतिष्ठित कवयित्री एवं ग़ज़ल की शोधार्थी होने के कारण कई उर्दू के ग़…
कथित “सभ्य” कहे जाने वाले, समाज के कुछ चेहरे। धीमे पग धर, आहट छिपाए, चढ़ते हैं अंधी …
भगवान् बोले: ज्ञान हेतु हे प्रिय अर्जुन! तुम अब अति श्रद्धावान बनो, माया-बंधन से मुक…
‘लबरा हमर उपनाम । लबरइ हमर उपकाम ।’ बिना लागलपट के बोले के हमर आदत के कारण हमरा प्रत…
भारत माँ की रक्षा करना, सबकी ज़िम्मेदारी है! देश की सीमा पर सैनिकों, की ही पहरेदारी …
शहर के चौराहे पर खुल गई अँधेरे की दुकान बेचा जा रहा है खुलेआम तोल तोल कर और खड़ा है …
प्रकृति की यह लाडली, चुनरिया पहनकर हरा, धरती पे उतरी अभी, सावनी हरित अप्सरा! सुरमयी …
हे जग के सिरजनहार प्रभु! मैं तुमको क्या भेंट चढ़ाऊँ? सारे जगत को देने वाले, मैं क्या…
बड़ी ही ख़ामुशी से चुपके-चुपके दिल चुरा लेंगे, हमारा वादा है एक दिन तुम्हें अपना बना…
छोटकी जब-जब पूछे— "बाबूजी!" हृदय रोवे, करेजा फाटे, का बताईं, कैसे समझाईं आ…
हिंदी की समकालीन महिला ग़ज़लकारों में रूबी गुप्ता सत्येंद्र का नाम बहुत जाना-पहचाना नहीं है, लेक…
पावन धरणी की मिट्टी को, जिसने अपना तिलक बनाया, और लहू की बूँद-बूँद से, सींच-सींचकर व…
अपनी मेहनत से मुअत्तर है बगीचा अपना, हम हैं मज़दूर, महकता है पसीना अपना। राह हमवार न…
युग में एक बार कवि आते, मन को राह दिखाने को। किंतु यहाँ पर लोग लगे हैं, निज शक्ति आज़…
" राष्ट्रगीत में भला कौन वह भारत-भाग्य-विधाता है, फटा सुथन्ना पहने जिसका गुन हर…
सौम्या ने हाल ही में अपने जीवन के अठारह वर्ष पूरे कर उन्नीसवें वसंत में कदम रखा था। …
सन् सत्तावन की क्रांति-लहर! जय वीर कुँवर! जय वीर कुँवर! वह आज़ादी का दीवाना, वह दीप-…
ज्यों ही रात के बारह बजे, रमेश जी ने पत्नी रमणी का माथा चूमते हुए ताली बजाना शुरू कर…
अमर शहीदों को मेरा प्रणाम, आज़ादी के दीवानों को अरबों प्रणाम! तेरी कुर्बानी को अरबों…
1. हुई राधिका सुप्त, गुप्त बात पूछो तो क्या है? पावस का उल्लास, पास श्याम क्यों नहीं…
आख़िरकार बटुक बाबू को ज़मानत नहीं मिल पाई और पुलिस ने उन्हें गिरफ़्तार कर लिया। वह प…
बहुत बधाई आपको प्रीति सुमन जी आज । कीर्तिमान यह आपका, हम सब को है नाज ।। जीवन के हर …
चमचमाते हाईवे के एक ओर बसा एक छोटा-सा गाँव है। पंचायत द्वारा बनवाई गई पक्की नालियाँ,…
देश-प्रेम पर जाँ न्योछावर, कर मेरे मनमीत! जिसके हिय में दया नहीं है, वह क्या जाने प्…
मुहब्बत- जैसे अलसुबह मंदिर से आती हुई घंटियों की झंकार, आरतियों की मधुर-मधुर स्वर-ल…
मुझको बता क्यों गीत लिखूँ मैं, मनोभावों की हर रीत लिखूँ मैं! नदियों ने तो सागर पाया,…