बाप, बाप होता है(कहानी) - श्यामल बिहारी महतो
'आखिर उसने जो कहा, कर ही डाला।' मंच, मंच पर हमने नेताओं का रूप बदलते, पार्टी…
'आखिर उसने जो कहा, कर ही डाला।' मंच, मंच पर हमने नेताओं का रूप बदलते, पार्टी…
पाँव पखारे निशि-दिन सागर, नमन करे। गंग-यमुन वैजयंती उर की, संताप हरे। हिम-किरीट है म…
दिल्ली हो या जमुई या हाथरस, आजकल ऐसी घटनाएं जैसे आम हो गई हैं, जो बेहद शर्मनाक हैं। …
बोलने का मन हो, कुछ बातें एकांत के लिए भी बचाकर रखो। सुनसान में कह सकते हो, गा सकते …
ऐसा कौन भला धरती पर, सारे जग को गले लगाए? प्रेम करे या दे दे गाली, फिर भी तेरा प्यार…
न जाने कब मिले, हो गई दोस्ती-यारी, क्रिया योग की जमकर कर ली तैयारी। मिला वही जो कहा …
शाम के सात बजे थे। सूरज डूबने के बाद अंधेरा फैल चुका था। लोग अपने-अपने घरों को लौट र…
शोषण की चक्की चली, पिसा आत्मविश्वास। सत्ता के इस खेल से, मन है निपट उदास।। फ़ूट डाल …
नारी नर का ग्रास बन रही, दैत्यों के आहार बन रही। रोज़-रोज़ संताप सह रही, चांडालों का…
हाथरसी के भूल के, पढ़ दोहा चटकार। एक बेर फेनू भेल ,आज नवल अवतार।। बस अप्पन हो जयकार।…
आजकल... आँखों पर पट्टियाँ बाँधकर दौड़ में शामिल हैं लोग, दिल पर अपने हाथ रखकर भी अब …
दिव्या खिड़की से बाहर तेज़ होती बारिश को टकटकी लगाए देखे जा रही थी। मानो एक तूफ़ान ब…
अक्षों में भी वाक् है, वाचिक 'मूक' और 'वाचाल', 'अक्ष', '…
लोगों से मैंने कोई भी शिकवा नहीं किया जो भी है सामने है दिखावा नहीं किया माना कि क…
उर्दू और हिंदी ग़ज़ल साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर, सुप्रसिद्ध ग़ज़लकार श्री राजेन्द्र …
जब चोरों की बाढ़, जुआरी बढ़ आकाश छुएगा। कहीं, किसी भी जगह बाल, स्त्री पर ज़ोर करेगा।…
जहाँ लेखनी बनी खडग और शब्द बने हुंकार, दिनकर जी ने गढा हिन्दी का नूतन एक शृंगार। वी…
बोले पे सॉंच आज मनाही बहुत हय इहमा त झूठ के ही गवाही बहुत हय चारों तरफ शोर गीत कीर्त…
हैं ताश के बावन पत्ते, ये सबके सब हरजाई, कोई हारे या फिर जीते, सब बोलें राम-दुहाई। प…
कथ्थी ला बउआ रुसल हते, पेटकुनिआ धइले सुतल हते | गेल रहे पढ़ेला शह…
सुबह का समय था। बाहर से मेरे कुछ दोस्त आए हुए थे। कुछ खाने-पीने के बाद हम साथ बैठे च…
एक वादा मुझे निभाना था, उसके ही साथ घर बसाना था। सात फेरे लिए थे जीवन के, साथ महबूब …
घर के बाहर मान-मर्यादा, हर जुबाँ पे अब चढ़ आई, अपने ही भारत-भूमि पर, जैसे लगती हूँ म…
रंग-बिरंगे मुखौटों में, जब जात का मंत्र फुँकाएगा, अस्पताल की वह साँस भी, इलेक्शन का …
टूटे दर्पण की छवि अगणित, प्रेयसि! खंडित उपहार न दो, अंजलि-अंजलि फूल सहज दो, विगलित अ…
' हुंकार', 'उर्वशी', 'रश्मिरथी', 'संस्कृति के चार अध्याय…
बाबा की बगिया को देखो, कैसे-कैसे खिलते फूल! क्या कह दी कानों में तितली, हँसते-हँसते …
सत्य, अहिंसा और शांति का बापू ने संदेश दिया, त्यक्त-तिरस्कृत दीन-जनों को सामाजिक परि…
जीवन में सब कुछ पाना है, दस धर्मों को अपनाना है! सुख, शांति, प्रगति, यश पाना है, दस …