न जाने कब मिले, हो गई दोस्ती-यारी,
क्रिया योग की जमकर कर ली तैयारी।
मिला वही जो कहा आपने, पाया सबने,
शक्ति-जागृत-मंत्र बताया सबको रब ने।
शक्ति-जागृत-मंत्र वही जो कृष्ण कन्हैया,
करते बैठ कालिया के फन ता-ता-थैया!
वही जागृत मंत्र कि जिसने रावण मारा,
दुराचारी को पलभर में जिसने संहारा।
यह वह मंत्र जो दे जाता है जीवन-मुक्ति,
यह आराध्य से मिलवाता है देकर भक्ति।
इसने कई दफ़ा देखा है दुखों से निपटना,
गुरु की कृपा हुई, न समझो तन से लिपटना।
कुंडलिनी-जागृति करता यह योग बड़ा है,
हर संकट-चौराहे पर तन आज खड़ा है।
आओ, पहले पाओ, जाओ ख़ुश हो करके,
अरे मूढ़! क्यों अजगर-सा है मर-मर करके?
यदि जागृत नहीं हुई, जीवन धिक्-धिक् है,
फिर कोटि-कोटि जैसा तू बना पथिक है।
सावधान! जीवन संचालित करता जो है,
तेरे पथ को देता शक्ति मात्र प्रभु है।
— त्रिपुरारी कुमार पाण्डेय