मृत्यु का तांडव (नवगीत) - साधना कृष्ण
हाय! मृत्यु का तांडव जारी। फटा ग्लेशियर वहाँ अचानक, फिर आया सैलाब भयानक। अफ़रातफ़री …
हाय! मृत्यु का तांडव जारी। फटा ग्लेशियर वहाँ अचानक, फिर आया सैलाब भयानक। अफ़रातफ़री …
नदी एक मर गई आज मेरे जवार की। नदी मरी तो मरीं मछलियाँ जल बिन तड़प-तड़प, मछली बिन मछु…
मेघ! गगन चढ़ इठलाते हो इतराते हो! जनम-जनम का नेह धरा से झुठलाते हो! धूल फाँकती गोरैय…
कल नहीं जब मैं रहूँगा याद आऊँगा। मौन हो गुमसुम रहा समझा गया चुप्पा, सबकी नज…
तू कब तक सहती रहेगी, ये अभद्र टिप्पणियाँ? तू कब तक देखती रहेगी, अस्मिता की ऐसी धज्जि…
किस-किस से लड़कर क्या लोगे भरत तिवारी! भ्रष्टाचार घुसा नस-नस में, बढ़ी खुमार…
युद्ध करके क्या भला हासिल करोगे! क्षत-विक्षत लाश, चीखें, हवा दमघोंटू, बाप-माँ के उड़…
न जाने क्यों मुझे मेरा शहर अच्छा नहीं लगता कई सड़कें चकाचक बन गईं हैं पुल बने इतने म…