अँगना सूख्खल बरसे पान ( बज्जिका लघुकथा) — डॉ. सतीश चन्द्र भगत
गज्जू बाबा से पूछलक— "तनी बताबऽ हमरा कि 'अँगना सूख्खल बरसे पानी' के मतल…
गज्जू बाबा से पूछलक— "तनी बताबऽ हमरा कि 'अँगना सूख्खल बरसे पानी' के मतल…
“आहे! सबेरे-सबेरे धनेसर कहाँ निकल गेल? एतवार रहई, आजो त दूरा-दरबजा पर रहीत। कोनो टह…
दीनबंधु के बाबूजी लम्मा बेमारी से गुजर गेलथिन। एक्कर जेतना कमाएल-खटाएल रूपइआ जमा रहई…
दू गो सतबा भाई बाप के लहास के आग देबे के लेल लरइत रहे । भर गांओ के लोक स स…