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"साहित्य, समाज एवं सांस्कृतिक विमर्श की नई संवाहिका — बोधायन"

​प्रिय लेखक बंधु, विचारको एवं सुधी कवियों,

​अत्यंत हर्ष और गौरव के साथ सूचित किया जाता है कि हिन्दी साहित्य, लोक-संस्कृति और समकालीन सामाजिक सरोकारों को एक नया मंच देने के उद्देश्य से पत्रिका 'बोधायन' के प्रथम अंक (अंक-1) की वैचारिक रूपरेखा तैयार हो चुकी है।

'बोधायन' पत्रिका का भविष्य और स्वरूप:

यह पत्रिका वर्तमान में ऑनलाइन (वेबसाइट/ब्लॉग) माध्यम से देश-विदेश के पाठकों तक पहुँचेगी, और बहुत जल्द ही इसे ऑफलाइन (भव्य प्रिंट रूप) में भी प्रकाशित किया जाएगा। पत्रिका का उद्देश्य व्यावसायिक न होकर विशुद्ध रूप से साहित्यिक शुचिता, मौलिक लेखन और गंभीर विमर्श को बढ़ावा देना है।

​इस बौद्धिक महायज्ञ के पहले अंक को समृद्ध बनाने के लिए हम देश-विदेश के सम्मानित रचनाकारों, शोधार्थियों, कवियों और लेखकों से उनकी श्रेष्ठ एवं मौलिक रचनाएँ सादर आमंत्रित करते हैं।

​पत्रिका के स्थायी स्तंभ एवं स्वीकृत विधाएँ:

​'बोधायन' पत्रिका में साहित्य की गरिमा को अक्षुण्ण रखने के लिए गद्य और पद्य दोनों ही विधाओं को अलग-अलग श्रेणियों (Columns) में विभाजित किया गया है। आप अपनी रुचि के अनुसार निम्नलिखित विधाओं में अपनी रचनाएँ भेज सकते हैं:

​ खंड १: पद्य तरंग (काव्य अनुभाग)

  • काव्य वीथी: समकालीन और आधुनिक विषयों पर गंभीर वैचारिक कविताएँ।
  • गीत-गूँज: हिन्दी के पारम्परिक गीत, नवगीत और छंदबद्ध रचनाएँ।
  • सुख़न के रंग: उत्कृष्ट हिन्दी गज़लें, शे'र और भावपूर्ण मुक्तक।
  • परम्परा की सुवास: दोहे, कुंडलियाँ, चौपाइयां या अन्य शास्त्रीय काव्य रूप।

​खंड २: गद्य विमर्श (वैचारिक एवं कथा अनुभाग)

  • वैचारिकी (शोध-आलेख): साहित्य, संस्कृति, लोक-परंपरा, ग्रामीण परिवेश और समकालीन सामाजिक विषयों पर गंभीर एवं आलोचनात्मक लेख।
  • कथा-शिल्प (कहानियाँ): आज के समाज, मानवीय संवेदनाओं और जीवन के यथार्थ को बुनती बेहतरीन कहानियाँ।
  • बोधि-कण (लघुकथाएँ): संक्षिप्त लेकिन समाज पर गहरा प्रभाव छोड़ने वाली मारक लघुकथाएँ।
  • व्यंग्य-बाण: सामाजिक और व्यवस्था की विसंगतियों पर करारा प्रहार करते साहित्यिक व्यंग्य।
  • स्मृति-रेखा: जीवन के जीवंत अनुभव, संस्मरण, रेखाचित्र या यात्रा-वृत्तांत।
  • कृति-समीक्षा: हिन्दी जगत में हाल ही में प्रकाशित हुई नई पुस्तकों की निष्पक्ष साहित्यिक समीक्षा।

​आवश्यक नियम एवं मार्गदर्शिका:

  1. मौलिकता सर्वोपरि: रचनाएँ पूरी तरह से मौलिक, अप्रकाशित और अप्रसारित होनी चाहिए (वे पहले किसी अन्य ब्लॉग, सोशल मीडिया या पत्रिका में छपी न हों)।
  2. भाषा और टंकण: रचनाएँ केवल हिन्दी (Unicode/Mangal font) में ही टाइप की हुई स्वीकार की जाएंगी। कृपया पीडीएफ (PDF) या हाथ से लिखे कागज़ की फोटो खींचकर न भेजें।
  3. परिचय: रचना के अंत में अपना संक्षिप्त परिचय (नाम, शहर, पद/कार्य, एवं मोबाइल नंबर) अवश्य दर्ज करें।
  4. अधिकार: रचनाओं के चयन, संपादन और परिमार्जन का पूर्ण अधिकार 'बोधायन' के संपादक मंडल के पास सुरक्षित रहेगा।

​ रचना भेजने का माध्यम और विवरण:

​आप अपनी टाइप की हुई रचना के साथ अपना एक सुंदर पासपोर्ट साइज फोटो नीचे दिए गए आधिकारिक माध्यमों पर भेज सकते हैं:

  • ​📧 ईमेल आईडी: bodhayanpatrika@gmail.com

​आइए, अपनी लेखनी के माध्यम से लोक-संस्कृति और सामाजिक चेतना के इस नए वैचारिक अनुष्ठान 'बोधायन' का हिस्सा बनें और हिन्दी साहित्य के इस मंच को वैचारिक समृद्धि प्रदान करें।

सद्भावना सहित,

बोधायन पत्रिका

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  बोधायन पत्रिका: शब्द, संस्कृति और चेतना का अधिष्ठान ​"बोधायन" केवल एक नाम नहीं, बल्कि ज्ञान की उस सनातन परंपरा का प्रतीक है जो हमें सत्य, शोध और विवेक की ओर ले जाती है। महान ऋषि और गणितज्ञ बोधायन के गौरव को समर्पित यह पत्रिका साहित्य, कला, समाज और संस्कृति के अंतर्संबंधों को रेखांकित करने का एक विनम्र प्रयास है। ​ हमारा उद्देश्य: आज के बदलते दौर में जहाँ गाँव, लोक-परंपराएँ और हमारी बोलियाँ (जैसे हमारी मिट्टी की महक और बज्जिका संस्कृति) शहरीकरण की धुंध में खो रही हैं, 'बोधायन' उन बिखरे हुए मोतियों को सहेजने का संकल्प है। हमारा उद्देश्य गंभीर सामाजिक विमर्श को मंच देना, नवोदित प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना और स्थापित साहित्यिक मूल्यों को एक नया आकाश देना है। ​ — संपादकीय मंडल, बोधायन पत्रिका