मटकी से माखन खाया (श्री कृष्ण वर्णन) - डॉ. सतीश चन्द्र भगत
मटकी फोड़ कृष्ण कन्हैया, छुप-छुपकर माखन खाया। लीला देख यशोदा मैया, हो हर्षित मन मुस्…
मटकी फोड़ कृष्ण कन्हैया, छुप-छुपकर माखन खाया। लीला देख यशोदा मैया, हो हर्षित मन मुस्…
एक बड़ी, दो छोटी बहना, एक खरी, दो खोटी बहना। सदा झगड़ती रहती मुझसे, जो है सबसे मोटी …
सावन का यह मस्त महीना, खुशियाँ लाया अपार। अमर प्रेम का बंधन राखी, भाई-बहन का प्यार। …
पापा जब भी डाँट लगाते, दादा जी झट गले लगाते। 'छोटा है यह' कहकर हँसते, अपने प…
सात रंग से रंगा नभ में, इंद्रधनुष उग आया। छाता ओढ़े बंटी राजा, देख-देख मुस्काया। रिम…
इंतज़ार में गोनू काका, खेतों में केवल धूल उड़े। बीज नहीं बोए अब तक वे, उमड़-घुमड़ कर…
काले-काले, गज़ब निराले, आसमान में बादल छाए। रह-रह गरजे, उमड़े-घुमड़े, बिजली रानी आँख…
भारत माँ की रक्षा करना, सबकी ज़िम्मेदारी है! देश की सीमा पर सैनिकों, की ही पहरेदारी …