मटकी से माखन खाया (श्री कृष्ण वर्णन) - डॉ. सतीश चन्द्र भगत

मटकी फोड़ कृष्ण कन्हैया,
छुप-छुपकर माखन खाया।

लीला देख यशोदा मैया,
हो हर्षित मन मुस्काया।

कितना भोला-भाला लगता,
क्यों उसने दोष लगाया?

क्या ऐसा भी हो सकता है?
चोरी कर माखन लाया।

मेरे घर माखन की मटकी,
तेरे घर नहीं चुराया।


— डॉ. सतीश चन्द्र भगत
   दरभंगा, बिहार 

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