हे महादेव! हे वैरागी!
हे जटाजूट! हे कैलाशी!
हे नीलकंठ! हे दुखहर्ता!
हे त्रिभुवन के पालनकर्ता!
हे निर्विकल्प! हे चिदाकाश!
हे निराकार! हे विषपायी!
हे महाकाल! हे मृत्युंजय!
जीवनदाता! हे अविनाशी!
संकट छाया है घोर प्रभु!
कब होगा फिर से भोर प्रभु?
काले बादल में सिमट रहा,
उजियारा चारों ओर प्रभु!
हम कब से तुझे पुकार रहे?
करबद्ध हैं तेरे द्वार खड़े।
दिन-रात संघर्ष में रत अरे,
तेरे संबल का आश लिए!
जागो, जागो हे महादेव!
हे गिरीश! हे शंकर जागो!
जग त्रिविध ताप से तड़प रहा,
हे मृत्युंजय! निद्रा त्यागो।
क्षण में दैहिक सब क्लेश हरो,
आनंद-हृदय संदेश भरो।
दे दो हमें जीवनदान प्रभु!
तुम हो करुणा के धाम प्रभु!
मानव जो दानव बना प्रभु,
जो भ्रष्ट राह पर चला प्रभु!
उसको भी सत्पथ दिखलाओ,
या भस्मासुर-सा निपटाओ।
दुष्टों का अब संहार करो,
मानव का सफल संसार करो।
जीवन में आश जगाओ प्रभु!
जीवन में राह दिखाओ प्रभु!
- अर्चना चौधरी
समस्तीपुर, बिहार