कथ्थी ला बउआ रुसल हते (बज्जिका ग़ज़ल) -डॉ. सतीश चन्द्र भगत
कथ्थी ला बउआ रुसल हते, पेटकुनिआ धइले सुतल हते | गेल रहे पढ़ेला शह…
कथ्थी ला बउआ रुसल हते, पेटकुनिआ धइले सुतल हते | गेल रहे पढ़ेला शह…
किसुन जलम लेलन ओहे जेहलख़नमा, कंस के करनमा न! भादो अठमी के रात, किसुन लेलन अवतार, सब…
‘लबरा हमर उपनाम । लबरइ हमर उपकाम ।’ बिना लागलपट के बोले के हमर आदत के कारण हमरा प्रत…
आएल असाढ़ महीना, दूर जो न कोरोना, रुकल हमर गौना हए। पिया जे अइतन बोलाबै, डोलिया फना …
गौरइआ के जोड़ी हमरा बगान में - कोरोटन के डार पर तिनका - तिनका जोड़ के बनएलक एगो घोंस…
“आहे! सबेरे-सबेरे धनेसर कहाँ निकल गेल? एतवार रहई, आजो त दूरा-दरबजा पर रहीत। कोनो टह…
दीनबंधु के बाबूजी लम्मा बेमारी से गुजर गेलथिन। एक्कर जेतना कमाएल-खटाएल रूपइआ जमा रहई…
दू गो सतबा भाई बाप के लहास के आग देबे के लेल लरइत रहे । भर गांओ के लोक स स…
सुनकऽ बातो हिआं न अइले तूं। आइकल दिल कहाँ लगइले तूं। एक सूरत बनल रहे मन में, कोन…
प्रदूषण के जे हाल हए, स्वस्थ जीवन बेहाल हए। पेड़ पौधा सुख रहल हऽ, जीवन जीना मुहाल हए…