दू गो सतबा भाई बाप के लहास के आग देबे के लेल लरइत रहे । भर गांओ के लोक स समझा-समझा के थाक गेल मगर कोनो रस्ता न निकाल पएलन।तखुनते असमसान घाट के बगल से एगो बूढ़ साधू जाइत रहे , मारे झंझमंझ होइत देख के ऊ ऐक गोटे से पुछलन,
" आरे बउआ कथी के झंझट चल रहल हए "
तs एक गोटे बोलल ,
डंडोत बाबा ! ई जे चिता पर परल लहास देख रहलिअई हन नs, हून दू गो बेआह कएले रहथ , दुनु घर से एकs गो नन्हकिरबा भेलन लेकिन बर बेटा सगही घर से हन आ बेआही घर से छोट बेटा हन । आब झंझट हो रहल हए ,हम ओकिआरी देम तs हम देम । बेआही घर के बेटा कह रहल हम्मर माए के बेआह के पहिले लएलन रs, तs हम्मर अधिकार जादा हए ,सतबा भाई कह रहल हए हम बर हती हम आग देम ।इहे रग्गर चल हए बाबा ।"
" अछा ! ओ! ई बात हए , तनका तों सs हट तs , दुनु भाई से हमरा कुछ बात करे दे "
लोक सs कहलक ,
" हो सुनई जाहो नs थोरे दम धरा , ई बरका पहूँचल बाबा हथिन , कुछ न कुछ चमत्कारी फएसला होबे करतो । "
बाबा पहिले सतबा घर के बेटा जे बर बेटा रहे तेकरा बोलएलन आ कान में कुछ कहलन,आ तेकर बाद ओहे बात बेआही घर के बेटा के कहलन ।
लोक स फेर घाऊँ-माऊँ करे लग्गल। दुनु बेटा अपना अपना माई से बतिआ रहल हए।
तs फेर बाबा बोललन ,
" हं तs कि फएसला कएले दुनु "
तs बरका बेटा फटाक से बोलल ,
" बाबा फएसला भे गेलई ,बाबूजी के किरिआ-करम छोटके करतई, हम बाहर से साथ रहबई "
छोटका बेटा के आँख डबडब मगर असीम सबर से भरल रहे।
किरिआ करम के अंतिम रोज बाबा फेर केम्हरो से परगट भे गेलन आ छोटका के पुछलन ,
" बेटा तों त बहुत भागसाली हतs , हम तोरा दुनु भाई से एके बात कहले रहिओ मगर देखहो जेक्कर भाग आ अधिकार में रहई पुन कमाए के तेकरे मओका भेंटल। "
छोटका सोंचलक बाबा त एके बात जे कहले रहथ कि , " रे बउआ, ओकरे करे दही किरिआ करम तोहर समै अभी ठीक न चल रहल हऊ "
बाबा तs सहिए बात कहलन र जेक्कर बाप मर जाई ओक्कर समै केना ठीक भेलई। मगर सतबा भाई तेजी देखा के पीछे हट के खुश रहे आ बेआही घर के बेटा बेर -बेर बाबा के गोर पर अप्पन माथा धके अपन लोर से भींजा के तिरपित हो गेल रहे। आ माइओ-बाप के तिरपित कर देले रहे।
- ई. राणा ब्रजेश