बताईं उधो जी! (भोजपुरी पद्य) - भगवती प्रसाद द्विवेदी
मए गोपी रोकि लिहली गोकुल के रहिया, बताईं उधो जी! कान्हा खुद अइहें कहिया? कइके पिरिति…
मए गोपी रोकि लिहली गोकुल के रहिया, बताईं उधो जी! कान्हा खुद अइहें कहिया? कइके पिरिति…
जब आवत रहे सावन के पहला सोमवार, तब करत रहली धरती हरिहर सिंगार। मिली झूला झूलत रहली स…
आजु सुनीं हमरा से रउवा, कइसन बाटे बिहार। माटी गमके जइसे चंदन, मेहनत जेकर सार। गौतम ज…
जब खेलत-खेलत हम थक जाईं, तब डांटि के पास बोलावेले माई। दूरे से हमरा झूठे रोअले के, अ…