राष्ट्र प्रेम हर मन (देशभक्ति कविता) - ई. अरुण कुमार जैन
प्राणों का उत्सर्ग कर दिया, भारत माँ के आँचल में; सुख-सुविधाएँ सारी छोड़ीं, कूद पड़े…
प्राणों का उत्सर्ग कर दिया, भारत माँ के आँचल में; सुख-सुविधाएँ सारी छोड़ीं, कूद पड़े…
हे जन्मभूमि! तुमको सादर नमन हमारा। तेरा हरेक कण है प्राणों से हमको प्यारा।। नागपति-म…
आज़ादी का जश्न मनाओ, आज़ादी का मस्त महीना है, बड़े यत्न से मिली आज़ादी, इसे हमें कभी…
आओ सब मिल आज़ादी का पुण्य पर्व मनाएँ, भारत माता के पावन चरणों में अपना शीश नवाएँ। भा…
भारत माँ की रक्षा करना, सबकी ज़िम्मेदारी है! देश की सीमा पर सैनिकों, की ही पहरेदारी …
पावन धरणी की मिट्टी को, जिसने अपना तिलक बनाया, और लहू की बूँद-बूँद से, सींच-सींचकर व…
अमर शहीदों को मेरा प्रणाम, आज़ादी के दीवानों को अरबों प्रणाम! तेरी कुर्बानी को अरबों…