आज़ादी का जश्न मनाओ (देशभक्ति कविता) -राम शंकर शास्त्री

आज़ादी का जश्न मनाओ, आज़ादी का मस्त महीना है,
बड़े यत्न से मिली आज़ादी, इसे हमें कभी नहीं भुलाना है।
चंद्रशेखर, सुखदेव, भगत सिंह, खुदीराम, सुभाष को याद करना है,
जन-गण के मन-मंदिर में हमें भारत माता का चित्र सजाना है।
वंदे मातरम् के जयघोष को फिर से अम्बर तक हमें पहुँचाना है,
व्यर्थ न जाए शहीदों की कुर्बानी, अपने बच्चों को समझाना है।
शिक्षित कर संपूर्ण आबादी को, भारत माता की शान बढ़ाना है,
अपनी आज़ादी का लाभ हर घर के हर नागरिक को दिलाना है।
देवदूत बनकर शिक्षित जनों को कर्तव्य और अधिकार बताना है,
देश हमारा, हम हैं देश के रक्षक, यह साबित कर हमें दिखाना है।
भारत माता के वैभव को समृद्ध करने का सबको हुनर सिखाना है,
साहित्य, संस्कृति, विज्ञान, गणित, वेद-अध्यात्म का पाठ पढ़ना है।
सम्मान देकर सब धर्म-पंथ को उसका वंचित हक़ दिलाना है,
कोई किसी का हक़ न छीने, ऐसा संविधान हमें पुनः बनाना है।
आज़ादी की 79वीं वर्षगांठ पर मेधा को उचित स्थान दिलाना है,
सब जात-पाँत, धर्म-मजहब में भाईचारा कायम कराना है।
धूम-धाम से पावन अगस्त महीने में आज़ादी का जश्न मनाना है!


— राम शंकर शास्त्री
    सीतामढ़ी, बिहार 

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