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  ​ "साहित्य, समाज एवं सांस्कृतिक विमर्श की नई संवाहिका — बोधायन" ​प्रिय लेखक बंधु, विचारको एवं सुधी कवियों, ​अत्यंत हर्ष और गौरव के साथ सूचित किया जाता है कि हिन्दी साहित्य, लोक-संस्कृति और समकालीन सामाजिक सरोकारों को एक नया मंच देने के उद्देश्य से पत्रिका 'बोधायन' के प्रथम अंक (अंक-1) की वैचारिक रूपरेखा तैयार हो चुकी है। ​ 'बोधायन' पत्रिका का भविष्य और स्वरूप: यह पत्रिका वर्तमान में ऑनलाइन (वेबसाइट/ब्लॉग) माध्यम से देश-विदेश के पाठकों तक पहुँचेगी, और बहुत जल्द ही इसे ऑफलाइन (भव्य प्रिंट रूप) में भी प्रकाशित किया जाएगा। पत्रिका का उद्देश्य व्यावसायिक न होकर विशुद्ध रूप से साहित्यिक शुचिता, मौलिक लेखन और गंभीर विमर्श को बढ़ावा देना है। ​इस बौद्धिक महायज्ञ के पहले अंक को समृद्ध बनाने के लिए हम देश-विदेश के सम्मानित रचनाकारों, शोधार्थियों, कवियों और लेखकों से उनकी श्रेष्ठ एवं मौलिक रचनाएँ सादर आमंत्रित करते हैं। ​पत्रिका के स्थायी स्तंभ एवं स्वीकृत विधाएँ: ​'बोधायन' पत्रिका में साहित्य की गरिमा को अक्षुण्ण रखने के लिए गद्य और पद्य दोनों ही विधा...
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बोधायन पत्रिका

  बोधायन पत्रिका: शब्द, संस्कृति और चेतना का अधिष्ठान ​"बोधायन" केवल एक नाम नहीं, बल्कि ज्ञान की उस सनातन परंपरा का प्रतीक है जो हमें सत्य, शोध और विवेक की ओर ले जाती है। महान ऋषि और गणितज्ञ बोधायन के गौरव को समर्पित यह पत्रिका साहित्य, कला, समाज और संस्कृति के अंतर्संबंधों को रेखांकित करने का एक विनम्र प्रयास है। ​ हमारा उद्देश्य: आज के बदलते दौर में जहाँ गाँव, लोक-परंपराएँ और हमारी बोलियाँ (जैसे हमारी मिट्टी की महक और बज्जिका संस्कृति) शहरीकरण की धुंध में खो रही हैं, 'बोधायन' उन बिखरे हुए मोतियों को सहेजने का संकल्प है। हमारा उद्देश्य गंभीर सामाजिक विमर्श को मंच देना, नवोदित प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना और स्थापित साहित्यिक मूल्यों को एक नया आकाश देना है। ​ — संपादकीय मंडल, बोधायन पत्रिका