बापू की चम्पारण प्रयोगशालाएँ (कविता) - नन्दकुमार आदित्य
देहावसान पे रोया जिसके ज़ार-ज़ार जानी दुश्मन, सभी दंग थे बोल उठा जब निलहा ज़ालिम -ए …
देहावसान पे रोया जिसके ज़ार-ज़ार जानी दुश्मन, सभी दंग थे बोल उठा जब निलहा ज़ालिम -ए …
डगर हो चाहे जितनी मुश्किल, चट्टानों-सा अड़ना सीखो। आफ़ताब-सा जलना सीखो, जग को रोशन क…
ऐसा कौन भला धरती पर, सारे जग को गले लगाए? प्रेम करे या दे दे गाली, फिर भी तेरा प्यार…
मानवता का पाठ पढ़ाया गाँधी ने, समता का भी पाठ पढ़ाया गाँधी ने। जीवन देखा हमने उनका साद…
'आखिर उसने जो कहा, कर ही डाला।' मंच, मंच पर हमने नेताओं का रूप बदलते, पार्टी…
पाँव पखारे निशि-दिन सागर, नमन करे। गंग-यमुन वैजयंती उर की, संताप हरे। हिम-किरीट है म…
दिल्ली हो या जमुई या हाथरस, आजकल ऐसी घटनाएं जैसे आम हो गई हैं, जो बेहद शर्मनाक हैं। …