भारत के वीर सिपाही (कविता) - सरस्वती सिंह ' सरस '

आज़ाद वतन की ख़ातिर वीरों ने प्राण गँवाये
हमे याद है उनकी गाथा हम उनको भूल न पाये

भारत के वीर सिपाही
उनका बलिदान अमर है
धरती ही जिनकी माता
सरहद ही जिनका घर है
मिट्टी को चूम के अपने
माथे पर तिलक लगायें
हमें.....

भारत की धन्य वो माता
जिस पर आकाश भी रोया
दुश्मन से लड़ते-लड़ते
है अपने लाल को खोया
हर माँ का पुत्र हो ऐसा
जो दूध का कर्ज़ चुकाये
हमें.......

घुसकर दुश्मन की सीमा में 
दुश्मन को ललकारे
सूरज चंदा और तारे
इसका प्रमाण हैं सारे
गिरना था जहाँ पसीना
वीरों ने लहू गिराये
हमें......

करते हैं नमन भारत को
जिसकी मिट्टी है सोना
साहस शांति समृद्धि,
प्रगति से महके कोना
राष्ट्रीय गौरव का तिरंगा 
हम युग-युग तक फहरायें
हमें......


— सरस्वती सिंह ' सरस ' 
बनारस, उत्तर प्रदेश 


एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने
बोधायन पत्रिका
बोधायन पत्रिका