भाषा बहता नीर (गीत) - भगवती प्रसाद द्विवेदी
' भाषा बहता नीर' हमारी हिंदी है, तहज़ीबी तासीर हमारी हिंदी है। इसमें गंगा-जम…
' भाषा बहता नीर' हमारी हिंदी है, तहज़ीबी तासीर हमारी हिंदी है। इसमें गंगा-जम…
किसुन जलम लेलन ओहे जेहलख़नमा, कंस के करनमा न! भादो अठमी के रात, किसुन लेलन अवतार, सब…
खुलता मधुर नेहागार। राखी अनुपम वो त्योहार।। झलके भाई का व्यवहार, अभिव्यक्त होते उद्ग…
रेशम के धागे में बँधा है भाई बहन का प्यार ये है राखी का त्योहार सूनी रहे ना कोई कल…
बिजली चमके, बादल गरजे, साजन कैसे निकलूँ घर से? कि सावन झूम-झूम के बरसे, मैं कैसे निक…
जलद-मेघ भी अब तो आया, व्योम तिमिर घन छाया। गरजे घम-घम, लप-लप चमके, थर-थर काँपे काया।…
मिली भारती रात सपने में आकर, कहने लगीं अपने आँसू छुपाकर— बिता जो स्वर्णिम, मैं कल ढू…
भाव घायल हुए, शब्द आते नहीं, इसलिए आज हम गीत गाते नहीं! जो थे अपने, वही अब पराए हुए,…
प्रकृति की यह लाडली, चुनरिया पहनकर हरा, धरती पे उतरी अभी, सावनी हरित अप्सरा! सुरमयी …
सन् सत्तावन की क्रांति-लहर! जय वीर कुँवर! जय वीर कुँवर! वह आज़ादी का दीवाना, वह दीप-…
मुझको बता क्यों गीत लिखूँ मैं, मनोभावों की हर रीत लिखूँ मैं! नदियों ने तो सागर पाया,…
अगर कर्म है सत्य सुहावन, तो किस्मत तक दासी है। हो व्यवहार समानांतर तो, आँगन मथुरा-का…
जागृत अपने सोए मन को, सुनो सखे! करना होगा, जो भी क़ीमत जीवन की है, तुम्हें उसे भरना …
जन-जन में अति हर्ष, दर्श कर नभ मेघा घनघोर। शीतल हुई बयार, पपीहा दादुर करते शोर।। बिस…
बचपन की वो कहानियाँ, और वो मीठी लोरी, माँ के प्यार के धागे से, बँधी जीवन की डोरी। वो…
न ये ग़ज़ल है, न ये नग्मा है, न मेरे दिल की कोई आरज़ू है। मेरी इन आँखों में, तेरी …
यह बिहार, वह बिहार है जो, समर सदा ही जीता। इस मिट्टी के कण-कण में है, जनक-दुलारी सीत…
हे राम स्वयंवर में आना मौन निमंत्रण है राघव, प्रण कठिन पिता ने है ठाना, हे राम स्वयं…