राखी अनुपम वो त्योहार (गीत) - साधना कृष्ण

खुलता मधुर नेहागार।
राखी अनुपम वो त्योहार।।

झलके भाई का व्यवहार,
अभिव्यक्त होते उद्गार।
ये दिन होते बेहद खास,
जब भाई कहता आभार।
और प्रगाढ़ होता है प्यार।
राखी अनुपम वो त्योहार।।

बहना दे मन से आशीष,
भाई देता सुंदर उपहार।
हर दिशि छाती अजब बहार,
मन आँगन प्रेम की बारिश।
खुशियाँ बढ़ने के आसार।
राखी अनुपम वो त्योहार।।

तज कर अंतर्मन विकार,
कर बहना पर प्रेम निसार।
निसदिन करती यही कामना,
समृद्ध हो भाई का संसार।
होता शुचिता का विस्तार।
राखी अनुपम वो त्योहार।।


— साधना कृष्ण
(वैशाली, बिहार)

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