राखी के धागे में प्यार बसा है! (कविता) - अर्जुन प्रभात

राखी के धागे में प्यार बसा है,
प्यार बसा है, संसार बसा है।।

रिश्ता यह भाई-बहन का पावन,
अति सुकोमल और मनभावन।
इसमें पूरा परिवार बसा है,
प्यार बसा है, संसार बसा है।।

​सुखी रहे भाई, बहना यह चाहे,
भाई भी अपनी प्रतिज्ञा निभाए।
आशीष में छुपा दुलार बसा है,
प्यार बसा है, संसार बसा है।।

सदा बना रहे भाई-बहन का नाता,
खुशियों का झूला झुलाए विधाता।
जीवन के रिश्तों का सार बसा है,
प्यार बसा है, संसार बसा है।।


— अर्जुन प्रभात
कवि,लेखक , समीक्षक 
पद्य और गद्य की दर्जनों पुस्तकें प्रकाशित।
मंदाकिनी जैसी प्रतिष्ठित पत्रिका का लंबे समय तक संपादन।
संप्रति - एक इंटरमीडिएट कॉलेज में प्राचार्य ।

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