नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे (कविता) - चन्द्रगुप्त प्रसाद वर्मा "अकिंचन"
पाँव पखारे निशि-दिन सागर, नमन करे। गंग-यमुन वैजयंती उर की, संताप हरे। हिम-किरीट है म…
पाँव पखारे निशि-दिन सागर, नमन करे। गंग-यमुन वैजयंती उर की, संताप हरे। हिम-किरीट है म…
बोलने का मन हो, कुछ बातें एकांत के लिए भी बचाकर रखो। सुनसान में कह सकते हो, गा सकते …
ऐसा कौन भला धरती पर, सारे जग को गले लगाए? प्रेम करे या दे दे गाली, फिर भी तेरा प्यार…
न जाने कब मिले, हो गई दोस्ती-यारी, क्रिया योग की जमकर कर ली तैयारी। मिला वही जो कहा …
शोषण की चक्की चली, पिसा आत्मविश्वास। सत्ता के इस खेल से, मन है निपट उदास।। फ़ूट डाल …
नारी नर का ग्रास बन रही, दैत्यों के आहार बन रही। रोज़-रोज़ संताप सह रही, चांडालों का…
हाथरसी के भूल के, पढ़ दोहा चटकार। एक बेर फेनू भेल ,आज नवल अवतार।। बस अप्पन हो जयकार।…
अक्षों में भी वाक् है, वाचिक 'मूक' और 'वाचाल', 'अक्ष', '…
लोगों से मैंने कोई भी शिकवा नहीं किया जो भी है सामने है दिखावा नहीं किया माना कि क…
जब चोरों की बाढ़, जुआरी बढ़ आकाश छुएगा। कहीं, किसी भी जगह बाल, स्त्री पर ज़ोर करेगा।…
हैं ताश के बावन पत्ते, ये सबके सब हरजाई, कोई हारे या फिर जीते, सब बोलें राम-दुहाई। प…
कथ्थी ला बउआ रुसल हते, पेटकुनिआ धइले सुतल हते | गेल रहे पढ़ेला शह…
एक वादा मुझे निभाना था, उसके ही साथ घर बसाना था। सात फेरे लिए थे जीवन के, साथ महबूब …
रंग-बिरंगे मुखौटों में, जब जात का मंत्र फुँकाएगा, अस्पताल की वह साँस भी, इलेक्शन का …
टूटे दर्पण की छवि अगणित, प्रेयसि! खंडित उपहार न दो, अंजलि-अंजलि फूल सहज दो, विगलित अ…
' हुंकार', 'उर्वशी', 'रश्मिरथी', 'संस्कृति के चार अध्याय…
सत्य, अहिंसा और शांति का बापू ने संदेश दिया, त्यक्त-तिरस्कृत दीन-जनों को सामाजिक परि…
जीवन में सब कुछ पाना है, दस धर्मों को अपनाना है! सुख, शांति, प्रगति, यश पाना है, दस …
सोहर, समदन, बिरहा गाना भूल गए, चक्रव्यूह में फँस मुस्काना भूल गए। पहले पंछी मुक्त गग…
1 कहीं आँखों में वहशत है, कहीं सीने में दहशत है, अदावत है, बग़ावत है, फ़क़त दौलत की …