एकल गीत (छंदमुक्त) - प्रसाद रत्नेश्वर
सूख रहीं शाखाएँ असमय, अजर-अमर पेड़ की केवल सौ साल। पसंद थी हमें घने पेड़ की छाया, गाते…
सूख रहीं शाखाएँ असमय, अजर-अमर पेड़ की केवल सौ साल। पसंद थी हमें घने पेड़ की छाया, गाते…
रुख से ज़ुल्फ़ें हटाओ कि दीदार हो, माज़ी की बातों का फिर से इज़हार हो। एक नज़र की ही…
बरखा बच्ची थी तब भी प्यारी थी, मिट्टी-धूल की सौंधी महक से लिपटी। काली घटाओं के केश म…
शुभ हो जीवितपुत्रिका, सुखी रहे संतान। जननी के मन का यही, एकमात्र अरमान॥ माँ ममता का …
जितिया का पावन पर्व, लाया खुशियों की बहार, ममता की छाँव में पलता, माँ का सारा संसार।…
बालक क्रीड़ा-स्थल नहीं यह, मृत्यु निकट अब आया है। दुर्योधन कहता रण में अब, किसका तुझ…
क्यों लोगों के हृदय-स्थल में ब्रह्म मुहूर्त का वर है! योगी-जन का यह आधार है, गृहस्थो…
देहावसान पे रोया जिसके ज़ार-ज़ार जानी दुश्मन, सभी दंग थे बोल उठा जब निलहा ज़ालिम -ए …
डगर हो चाहे जितनी मुश्किल, चट्टानों-सा अड़ना सीखो। आफ़ताब-सा जलना सीखो, जग को रोशन क…
ऐसा कौन भला धरती पर, सारे जग को गले लगाए? प्रेम करे या दे दे गाली, फिर भी तेरा प्यार…
मानवता का पाठ पढ़ाया गाँधी ने, समता का भी पाठ पढ़ाया गाँधी ने। जीवन देखा हमने उनका साद…
पाँव पखारे निशि-दिन सागर, नमन करे। गंग-यमुन वैजयंती उर की, संताप हरे। हिम-किरीट है म…
बोलने का मन हो, कुछ बातें एकांत के लिए भी बचाकर रखो। सुनसान में कह सकते हो, गा सकते …
न जाने कब मिले, हो गई दोस्ती-यारी, क्रिया योग की जमकर कर ली तैयारी। मिला वही जो कहा …
शोषण की चक्की चली, पिसा आत्मविश्वास। सत्ता के इस खेल से, मन है निपट उदास।। फ़ूट डाल …
नारी नर का ग्रास बन रही, दैत्यों के आहार बन रही। रोज़-रोज़ संताप सह रही, चांडालों का…
हाथरसी के भूल के, पढ़ दोहा चटकार। एक बेर फेनू भेल ,आज नवल अवतार।। बस अप्पन हो जयकार।…
अक्षों में भी वाक् है, वाचिक 'मूक' और 'वाचाल', 'अक्ष', '…
लोगों से मैंने कोई भी शिकवा नहीं किया जो भी है सामने है दिखावा नहीं किया माना कि क…
जब चोरों की बाढ़, जुआरी बढ़ आकाश छुएगा। कहीं, किसी भी जगह बाल, स्त्री पर ज़ोर करेगा।…