लोगों से मैंने कोई भी शिकवा नहीं किया
जो भी है सामने है दिखावा नहीं किया
माना कि कोई दोस्त हमारा न हो सका
हमने भी दुश्मनी में गुज़ारा नहीं किया
फ़ाक़ाकशी के दौर से गुज़रे कभी मगर
हमने किसी अमीर का सजदा नहीं किया
दिल में छुपा के रखे हैं उल्फ़त के सारे राज़
हमने गली-गली तेरा चर्चा नहीं किया
बिछड़े अगर जो 'बन्धु' तो रोएँगे हम नहीं
ऐसा तो एक दूजे से वादा नहीं किया
- अविनाश बन्धु
पटना, बिहार