ऐसा कौन भला धरती पर,
सारे जग को गले लगाए?
प्रेम करे या दे दे गाली,
फिर भी तेरा प्यार ही पाए!
ऐसा कौन भला धरती पर...
जो तुमको ढोंगी कहते थे,
पत्थर भी फेंका करते थे,
भूख, वेदना, कष्ट दिए थे,
नित्य प्रताड़ित वही किए थे।
नेह, प्रेम, ममता बरसाकर,
कटुता लेकर, प्रेम लौटाए!
ऐसा कौन भला धरती पर...
अपना भोजन, नींद त्याग दे,
शांति, प्रेम भी उन्हें बाँट दे।
सतत कर्म जीवन भर चाहे,
प्राणी-मात्र को गले लगाए।
नर-पशु का भी भेद मिटाए,
विषधर को भी दूध पिलाए।
शंकर-पार्वती से बढ़कर,
करुणा के नित स्रोत बहाए!
ऐसा कौन भला धरती पर...
मर्यादा-श्रेष्ठ राम थे जग में,
रावण का संहार किया था।
योगेश्वर ने भी द्वापर में,
कंस-आदि का नाश किया था।
माँ दुर्गा ममता की मूरत,
महिषासुर-मर्दिनी कहलातीं।
माँ काली तो असुरों की,
काल-निशा से जानी जातीं।
असुर, तामसी को भी बदले,
देव-ऋषि भी उन्हें बनाए!
ऐसा कौन भला धरती पर...
युग-युग तक माँ तेरी ममता,
जग में नित जानी जाएगी।
करुणा, नेह की अविरल धारा,
अम्मा की ही कहलाएगी।
सतत प्रवाही माँ गंगा सी,
निर्मल-पावन जो कहलाए।
प्रेम, नेह, ममता की उद्गम,
अम्मा प्यारी ही कहलाए।
विष लेकर, अमृत-प्रदायिनी,
जगन्माता अम्मा कहलाए!
ऐसा कौन भला धरती पर...
- इंजी. अरुण कुमार जैन
अमृता हॉस्पिटल, सेक्टर 88, फ़रीदाबाद