सत्य, अहिंसा और शांति का बापू ने संदेश दिया,
त्यक्त-तिरस्कृत दीन-जनों को सामाजिक परिवेश दिया।
अपना सुख त्यागा सहर्ष बहुजन-सुखाय बापू ने,
हिंसक साधन हैं गर्हित, यह बतलाया बापू ने।
सादा जीवन, वैचारिक स्वच्छता, स्वदेशी-आकर्षण,
केवल अछूत-उद्धार, खादी, हिंदी, बुनियादी शिक्षण।
परे स्वार्थ से समयनिष्ठता, श्रमनिष्ठा अपनाना,
थकना मगर नहीं, पतितों से उनको गले लगाना।
पर अपमान सहन कर कायर बन जाना भी ठीक नहीं,
रक्षा हेतु शस्त्रधारण तक हिंसक वृत्ति प्रतीक नहीं!
— नन्दकुमार आदित्य
'कविवासर', 603/ए, बाणेर, पुणे - 411045