पर्वराज पर्युषण पर (कविता) - इंजी. अरुण कुमार जैन

जीवन में सब कुछ पाना है,
दस धर्मों को अपनाना है!
सुख, शांति, प्रगति, यश पाना है,
दस धर्मों को अपनाना है!

रोग, दुख, संताप मिटाना है,
दस धर्मों को अपनाना है!
हर लक्ष्य सहज जो पाना है,
दस धर्मों को अपनाना है!

क्षमा करो, झगड़े न होंगे,
क्रोध, शोक से सभी बचेंगे।
आर्जव, मार्दव हों जीवन में,
सरल बनें हम, नेह हो सब में।

शौच, सत्य का पालन कर लें,
कपट, कुटिलता जड़ से हर लें।
संयम जो जीवन में आए,
नेह-प्रेम हर मन में लाए।

तप करके दृढ़ता मन लाएँ,
जग के प्रेरक हम बन जाएँ।
अपरिग्रह, त्याग जो सभी धरेंगे,
नहीं धरा पर निर्धन होंगे।

वात्सल्य, अनुराग बढ़ेगा,
मैत्री, मुदिता-भाव बढ़ेगा।
आकिंचन्य जो मन में आए,
प्राणी दुख फिर कभी न पाए।

हर्ष, शांति हर पल मन होगी,
दिव्य अनुभूति तभी मिलेगी।
ब्रह्मचर्य-महिमा न्यारी है,
माँ, बहन, सुता हर नारी है!

आओ, इसको सब अपनाएँ,
नेह-प्रेम-सरिता मन लाएँ।
प्रगति, शांति, यश-सुमन खिलाएँ,
वसुधा को हम स्वर्ग बनाएँ।

हर वांछित, हर जन मन पाए,
दस धर्मों को हम अपनाएँ!
सुख, शांति, प्रगति, यश पाएँ,
हर दिव्य शिखर तक हम सब जाएँ!


— इंजी. अरुण कुमार जैन
अमृता हॉस्पिटल, सेक्टर-88, फरीदाबाद (हरियाणा)
मो. 7994691750

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