पेटकुनिआ धइले सुतल हते |
गेल रहे पढ़ेला शहर में,
बज्जिका कल्ला बिसरल हते |
इआद रखऽ अप्पन भासा के,
निम्मन हय आनो सिखल हते |
अब रहत नऽ अन्हरिआ बाबा ,
धिआ- पूता पढ़ी रहल हते |
जब सरकारों हए तइआर,
'सतीश' अब काहे व्याकुल हते |
- डॉ. सतीश चन्द्र भगत
बनौली, दरभंगा -847428