कथ्थी ला बउआ रुसल हते (बज्जिका ग़ज़ल) -डॉ. सतीश चन्द्र भगत

    कथ्थी ला बउआ रुसल हते,
    पेटकुनिआ धइले सुतल हते |

    गेल   रहे ‌ पढ़ेला   शहर   में,
   बज्जिका कल्ला बिसरल हते |

    इआद रखऽ अप्पन भासा के,
     निम्मन हय आनो सिखल हते |

     अब रहत नऽ अन्हरिआ बाबा ,
     धिआ- पूता  पढ़ी   रहल हते |

    जब सरकारों   हए     तइआर,
   'सतीश' अब काहे  व्याकुल हते |


    - डॉ. सतीश चन्द्र भगत 
      बनौली, दरभंगा -847428

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