हाथरसी के भूल के, पढ़ दोहा चटकार।
एक बेर फेनू भेल ,आज नवल अवतार।।
बस अप्पन हो जयकार।।
लिख लिख के अपने पढ़िह,करिह आत्म प्रचार।
चल परऽ नयका रास्ता, करऽ न तनिको विचार।।
बस अप्पन हो जयकार।।
राम भरोसे जिंदगी, काटू मत सरकार।
हाथ गोर मारू तनी, होई नइया पार।।
बस अप्पन हो जयकार।।
गीत ग़ज़ल के छोड़ के,अब रच्चू नवगीत।
कलम घसीटी में सदा,समय करू व्यतीत।।
बस अप्पन हो जयकार।।
खुद के काबिल मानना,होय पुण्य के काम।
आत्म मुग्धता के दवा, देत बहुत आराम ।।
बस अप्पन हो जयकार।।
बड़बोला के राज में,संतन के की काम।
अगर भलाई चाहऽ ले ,चल जो दूजा ठाम।।
बस अप्पन हो जयकार।।
- साधना कृष्ण
हाजीपुर, बिहार