एक वादा मुझे निभाना था,
उसके ही साथ घर बसाना था।
सात फेरे लिए थे जीवन के,
साथ महबूब का निभाना था।
चाँद-तारों में खो गए थे हम,
दूर जाने का बस बहाना था।
छोड़कर जा रही हो क्यों, बोलो?
मेरे घर को तुम्हें सजाना था!
एक मुद्दत के बाद यह जाना,
इस जहाँ में कहाँ ठिकाना था!
— सूरज तिवारी
भदोही (उत्तर प्रदेश)