चाँदनी रात गुज़र जाएगी(नज़्म) - संजय पवार

चाहे जितनी मस्त हो हयात, गुज़र जाएगी,
ख़ुशनुमा अगर हो चाँदनी रात, गुज़र जाएगी।

सुबह लेकर आएगी कोख में रंगी किरणें,
बाद उसके दर्द की यह बरसात, गुज़र जाएगी।

धीरे-धीरे चलती रहे ज़िंदगी सबकी यूँ ही,
हो भले खट्टी-मीठी बात, गुज़र जाएगी।

मिलते हैं नसीबों से, बिछड़ते हैं नसीबों से,
चलते-चलते जो मिली सौगात, गुज़र जाएगी।

कैसे-कैसे सपने और कैसे-कैसे लोग देखे,
वक़्त पर छोड़ दिली हर बात, गुज़र जाएगी।

यह रेला हम इंसानों का न जाने कहाँ चला,
दिल में मस्ती लिए यह बारात, गुज़र जाएगी।


— संजय पवार
    पुणे, महाराष्ट्र 

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