राधा-कृष्ण (छंदमुक्त स्तुति) - राजेन्द्र सहनी

राधा के कृष्ण
कृष्ण की राधा
राधा के प्रेम की पीर
कृष्ण बिन जाने कौन?
राधा प्रेम-विरह से व्यथित
कृष्ण राधा के प्रेम में उल्लसित
राधा आत्मा कृष्ण की
कृष्ण शरीर राधा का
दोनों परस्पर संपृक्त
करते द्वय अलौकिक प्रीत
कृष्ण, राधा बन तुम
मेरे हिए का हाल जानो
मैं जो कहती हूँ प्रिय
तनिक उसे मानो
नारी-हिए की कोमलता
प्रिय, तुम क्या जानो!
असार संसार का तुम
प्रेम-सार हो राधा
सृष्टि में प्रेम-विस्तार हो राधा
मैं कृष्ण, तुम राधा
मैं राधा, तुम कृष्ण
अंतर कहाँ दोनों में?
आत्म-दर्पण में देखो
आत्म-समर्पण करके देखो
प्रिय अलग रहा नहीं मुझसे कभी
आज भी अलग नहीं है मुझसे अभी
युगों-युगों से सृष्टि-चक्र का इतिहास है
हम दोनों रहते पवित्र प्रेम से एक साथ हैं।

- राजेन्द्र सहनी 
    सीतामढ़ी, बिहार 

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