फिर ख़्वाब हसरतों का सजा कर तो देखिए (ग़ज़ल) - अविनाश बन्धु

फिर ख़्वाब हसरतों का सजा कर तो देखिए
पूरा ख़ुदा करेगा, दुआ कर तो देखिए

राहों में मुश्किलें हैं तो रुकना नहीं कभी
क़दमों को हौसलों से बढ़ा कर तो देखिए

जो बात दिल में है उसे कह दीजिए अभी
अपनों को अपना हाल सुना कर तो देखिए

बिखरे हुए हैं ख़्वाब तो क्या ग़म है दोस्तों
इनको नए सिरे से बसा कर तो देखिए

हर मोड़ पर मिलेगी नई राह ज़िंदगी
मरहम यूँ दर्दे-ग़म का बना कर तो देखिए

दुनिया बदलने लगती है कोशिश के साथ ही
मेहनत को अपना मीत बना कर तो देखिए

मंज़िल मिलेगी आपको इक दिन ज़रूर ही
दिल में यक़ीन अपना जगा कर तो देखिए

अँधेरे कितने भी हों छटेंगे ये एक दिन
सच की मशाल एक जला कर तो देखिए

"बन्धु" ये ज़िंदगी है इसे यूँ न हारिए
उम्मीद का चराग़ जला कर तो देखिए


- अविनाश बन्धु 
   पटना, बिहार 

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