भादों की अँधियारी रात है, बादल घिर-घिर आए,
कारागार में जन्म लिया, प्रभु बाल-रूप धर आए।
वासुदेव ने शीश धरा हरि यमुना पार पहुँचाए,
टोकरी में हैं बालकृष्ण, नभ में बादल गुर्राए।
नंद बाबा घर आनंद छाया, बजे ढोल-शहनाई,
भरे मोद आमोद उतारे, नज़र जशोदा माई।
मनमोहन छवि बाल-रूप की तीनों लोक समाया,
मोर-मुकुट सिर, अधर है मुरली, पीताम्बर तन भाया।
कोई कहे वह माखनचोर है, कोई कहे गिरधारी,
कोई कहे प्रभु रास-रचैया, कोई कहे बनवारी।
आज उसी की जन्म-दिवस है, आओ दीप जलाएँ,
मन के सारे पाप कटे जो कृष्ण-नाम गुण गाएँ।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ!
- इंदु उपाध्याय
पटना, बिहार