किसुन जलम लेलन (बज्जिका गीत) - डॉ. विद्या चौधरी

किसुन जलम लेलन
ओहे जेहलख़नमा,
कंस के करनमा न!

भादो अठमी के रात,
किसुन लेलन अवतार,
सब खुल गेल केवार जेहलख़नमा,
कंस के करनमा न!

सुतल रह गेल पहरेदार,
फाटक खुल के तइयार,
वासुदेव ले के चललन,
नंद के भवनमा,
कंस के करनमा न!

जमुना उमर-घुमर के आबै,
वासुदेव मने-मन पछताबै,
जमुना छुए चाहै,
किसुन के चरणमा,
कंस के करनमा न!

किसुन चरण देलन छुआए,
जमुना घुट्ठी भर हो जाए,
वासुदेव पहुँच गेलन,
नंद के भवनमा,
कंस के करनमा न!

वासुदेव किसुन के देलन सुताए,
जशोदा के बेटी लेलन उठाए,
फेरू लउट गेलन
ओहे जेहलख़नमा,
कंस के करनमा न!

किसुन जलम लेलन
ओहे जेहलख़नमा,
कंस के करनमा न!


— डॉ. विद्या चौधरी
        पटना, बिहार 

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