मेरे आँसुओं में सदा तू है(गीत) - विलोक रंजन 'विभाकर'


​न ये ग़ज़ल है, न ये नग्मा है, न मेरे दिल की कोई आरज़ू है।

मेरी इन आँखों में, तेरी तस्वीरें, मेरे आँसुओं में इक रहती तू है।

न ये ग़ज़ल है ...........

​मेरे अश्कों के गिरते मोती, किसी दिलरुबा का प्यार है।

मेरे उल्फ़त के गुल हैं सूखे, आ के क्यूँ गई बहार है।

मेरे जीवन के प्रीत चमन में, न क्यूँ महकती तेरी खुशबू है।

न ये ग़ज़ल है ...........

​बुझी इश्क़े चिराग-ज्योति, मेरे दिल में हुआ अंधेरा,

मेरे दिल की ये बेकरारी, क्या शाम क्या सबेरा।

मेरी नज़र को, किसी बेवफ़ा का, क्यूँ दिल को रहता सदा जुस्तजू है।

न ये ग़ज़ल है ...........

​जानम न तुम डुबोती, मेरे अरमाँ का सफ़ीना,

न भँवर में रहते यूँ हम, जा संगदिल हसीना,

बेदर्द जानम, मेरी बेकसी पे, क्यूँ अब न बहता तेरा आँसू है।

न ये ग़ज़ल है ...........

​बेवफ़ा बेदर्द वक्त का, जाने क्या हुआ तकाज़ा

हुई नफ़रत दिलों में शामिल, उठा प्यार का जनाज़ा।

मेरी मोहब्बत का इक बेवफ़ाई, क्या इस जहाँ में दूजा पहलू है।

न ये ग़ज़ल है, न ये नग्मा है, न मेरे दिल की कोई आरज़ू है।



​विलोक रंजन "विभाकर"

स० प्रशाखा पदाधिकारी,

बिहार विधान सभा, पटना।


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