माँ के प्यार के धागे( गीत) - सुमंगला सुमन


बचपन की वो कहानियाँ, और वो मीठी लोरी,
माँ के प्यार के धागे से, बँधी जीवन की डोरी।

वो रूठना और मनाना, वो आँचल में छिप जाना,
चोट लगे घुटनों पर, माँ का सहलाना-पुचकारना।

यादों के उस बक्से में, है ममता की वो तिजोरी,
माँ के प्यार के धागे से, बँधी जीवन की डोरी।

परियों के किस्सों में माँ, अपना रूप दिखाती थी,
हाथों से खिलाकर निवाला, हर भूख मिटाती थी।

माथे पर चूमकर, भर देती थी आत्मविश्वास की बोरी,
माँ के प्यार के धागे से, बँधी जीवन की डोरी।

धूप-छाँव के इस जीवन में, यादें ही सहारा हैं,
माँ का वो दुलार ही, डूबते को किनारा है।

अतीत के हर पन्ने पर, माँ की ही लिखी है थ्योरी,
माँ के प्यार के धागे से, बँधी जीवन की डोरी।

- सुमंगला सुमन
       मुंबई 

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