मैं कैसे निकलूँ घर से ! (गीत) - मोईन गिरीडीहवी

बिजली चमके, बादल गरजे, साजन कैसे निकलूँ घर से?
कि सावन झूम-झूम के बरसे, मैं कैसे निकलूँ घर से!

मेरे साजन, मेरे दिलबर! बोलो कहाँ बैठे हो छुपकर?
अँखियाँ तो दर्शन को तरसें, साजन कैसे निकलूँ घर से?
कि सावन झूम-झूम के बरसे, मैं कैसे निकलूँ घर से!

याद सताए मुझको हरदम, तेरे बिन ऐ मेरे प्रीतम!
आँगन में न आऊँ डर से, साजन कैसे निकलूँ घर से?
कि सावन झूम-झूम के बरसे, मैं कैसे निकलूँ घर से!

ढलती जाए चढ़ती जवानी, क्या तुमको बतलाऊँ कहानी?
देख लो आकर खुद ही नज़र से, साजन कैसे निकलूँ घर से?
कि सावन झूम-झूम के बरसे, मैं कैसे निकलूँ घर से!

हूँ मैं दुखिया चिंता की मारी, फिर भी हूँ 'मोईन' तुम्हारी,
घर को आओ जल्दी सफ़र से, साजन कैसे निकलूँ घर से?
कि सावन झूम-झूम के बरसे, मैं कैसे निकलूँ घर से!


- मोईन गिरीडीहवी
पटना - 4

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