हे जग के सिरजनहार प्रभु! (प्रार्थना) - जया सिंह

हे जग के सिरजनहार प्रभु!
मैं तुमको क्या भेंट चढ़ाऊँ?
सारे जगत को देने वाले,
मैं क्या कुछ तुमको दे पाऊँ!

जिसकी ख़ुशबू से महके यह सारी दुनिया,
जो आनंद भरे अंतरतम में, दे ख़ुशियाँ,
हृदय-पुष्प अर्पित कर तुझको शीश नवाऊँ?
हे जग के पालनहार प्रभु!
तेरे चरणों की दासी बन जाऊँ!

छँटा अँधेरा मेरे जीवन से,
तुमने उज्ज्वल प्रकाश भर दिया,
क्षमा किए सब भूल मेरी,
निर्मल सुवास भर दिया!
बैठी तेरी शरण में आके,
हरि! तेरी ओर निहारूँ,
हे जग के तारनहार प्रभु!
तुम पे मैं बलिहारी जाऊँ!


— जया सिंह
(बक्सर, बिहार)

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