चुपके-चुपके दिल चुरा लेंगे(ग़ज़ल) - मोईन गिरीडीहवी


बड़ी ही ख़ामुशी से चुपके-चुपके दिल चुरा लेंगे,
हमारा वादा है एक दिन तुम्हें अपना बना लेंगे!

ज़माने की ख़ुशी झोली में तेरी डाल के एक दिन,
तेरे ग़म के हैं जितने बोझ, वो सब भी उठा लेंगे!

हम अपनी उँगलियों से फिर सँवारेंगे तेरे गेसू,
तेरे दामन में भरने के लिए तारे चुरा लेंगे!

तेरे नाज़-ओ-अदा ने जिस क़दर हमको सताया है,
वो माज़ी के सभी क़िस्से क़सम से हम भुला लेंगे!

न आने देंगे कोई ज़र्ब तेरे तन पे ऐ हमदम,
चलेंगे जब कभी ख़ंजर तो सर अपना झुका लेंगे!

तुझे रुसवा न होने देंगे जानम बज़्म-ए-याराँ में,
दिया है ज़ख़्म जो तूने उसे सबसे छुपा लेंगे!

तू जाता है तो जा, आने का वादा हो, नहीं भी हो,
हमारा होगा क्या, तन्हाई में आँसू बहा लेंगे!

ज़माना अह्ल-ए-उल्फ़त को यहाँ जीने नहीं देगा,
चलो वीराने में चलकर नई दुनिया बसा लेंगे!


— मोईन गिरीडीहवी
    पटना - 4, बिहार 



एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने
बोधायन पत्रिका
बोधायन पत्रिका