अमर शहीदों को मेरा प्रणाम,
आज़ादी के दीवानों को अरबों प्रणाम!
तेरी कुर्बानी को अरबों सलाम!
कर्मठता की ज्योति जलाकर,
संघर्षों में राह बनाकर,
कायम की है अनुपम मिसाल।
हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई,
जाना है तुमने अपना भाई,
सद्भाव की है कहाँ ऐसी मिसाल!
एक-एक तुम थे आज़ाद, गांधी,
तेरी चली भारत में आँधी,
तिनके-सा उड़ गया ब्रिटिश राज।
अंग्रेज़ों के छक्के छुड़ाकर,
सात समंदर पार भगाकर,
तूने किया नहीं हाय आराम!
गुलामी की बेड़ी को काट हटाया,
सुख-वैभव का राह दिखाया,
एक-एक मेरे लिए हो राधेश्याम।
तेरी तस्वीर को हिय में बिठाकर,
श्रद्धा-सुमन तव चरणों चढ़ाकर,
नाम जपूँ तेरा आठों याम।
तेरी कुर्बानी पर आँच न आने दूँगा,
तन, मन, धन ही नहीं, जान भी जाने दूँगा,
जपता रहूँ मंत्र सुबह-ओ-शाम!
— प्रोफेसर डॉ. गणेश राय
सीतामढ़ी बिहार
(एम.ए. हिंदी स्वर्ण पदक प्राप्त, पी-एच.डी., डी.लिट.)