1.
हुई राधिका सुप्त, गुप्त बात पूछो तो क्या है?
पावस का उल्लास, पास श्याम क्यों नहीं यहाँ हैं?
मधुबन है क्यों शांत, क्लांत चलो झूले डलवाओ।
सावन में सरकार, तार राधिके अब भिजवाओ!
रखे बंद घर-द्वार, हार पड़ी राधा आँगन में—
वीराना क्यों आज, राज़ रखा क्या इस सावन ने?
2.
भरी सखी री आग, राग बता मैं कैसे गाऊँ?
बसे दूर वो गाँव, ठाँव यह त्याग कैसे बुलाऊँ?
मेघ रहा है देख, रेख करम की मेरी भटकी।
सावन कजरी छोड़, जोड़ सखी अब किस्मत चटकी!
नाता गए वो तोड़, ओढ़ रखा चुप क्यों वृंदावन ने?
वीराना क्यों आज, राज़ रखा क्या इस सावन ने?
3.
भीगने की रख चाह, आह! निकली देखकर बादर,
बूँद नहीं अंगार, धार अग्नि की छाया चादर।
छल गया हमें श्याम, राम जाने क्यों किया ऐसा?
बता गया वो धत्ता, हटा मोगरा गजरा कैसा!
अब वह कहाँ सुगंध, बंद खिलना किया कानन ने—
वीराना क्यों आज, राज़ रखा क्या इस सावन ने?
— ममता तिवारी 'मृदुला'
(जांजगीर, छत्तीसगढ़)