हे जन्मभूमि तुमको सादर नमन हमारा ! (देशभक्ति कविता) - अर्जुन प्रभात


हे जन्मभूमि! तुमको सादर नमन हमारा।
तेरा हरेक कण है प्राणों से हमको प्यारा।।

नागपति-मुकुट तुम्हारा, तेरी छटा निराली,
फल-फूल से लदी है तेरी हरेक डाली;
लगता कुशल करों ने तव रूप को सँवारा।
हे जन्मभूमि! तुमको सादर नमन हमारा।।

नित शस्य-श्यामला है तेरी तमाम धरती,
सरिता-प्रवाह द्वारा यशगान तेरा करती;
पग को पखारती है सागर की शुभ्र धारा।
हे जन्मभूमि! तुमको सादर नमन हमारा।।

तेरी पुरी शृंगेरी, मथुरा, गया, अयोध्या,
अजमेर, स्वर्ण-मंदिर, सबमें तुम्हारी माया;
कन्याकुमारी तेरी, कश्मीर भी तुम्हारा।
हे जन्मभूमि! तुमको सादर नमन हमारा।।

उत्तुंग शीर्ष तेरा, उदात्त-सा हृदय है,
ममता की छाँव तेरी, जग को न कोई भय है;
हारे-थके पथिक को मिलता यहीं सहारा।
हे जन्मभूमि! तुमको सादर नमन हमारा।।

तू सभ्यता की जननी, तू संस्कृति की माता,
तुम से जुड़ा है जग का सदियों से स्नेह-नाता;
इंसानियत के तूने नव रूप को निखारा।
हे जन्मभूमि! तुमको सादर नमन हमारा।।

क्षमता, क्षमा, दया का तुझमें अनोखा संगम,
महिमा तुम्हारी गाएँ, शब्दों की शक्ति है कम;
हो जन्म जग में लेना, जन्में यहीं दुबारा।
हे जन्मभूमि! तुमको सादर नमन हमारा।।


— अर्जुन प्रभात


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