भारत माँ की रक्षा करना,
सबकी ज़िम्मेदारी है!
देश की सीमा पर सैनिकों,
की ही पहरेदारी है!
कल-कल बहती नदियाँ सारी,
जल से खेती होती है!
देखो, उगे हुए पेड़ों से,
हरियाली भी होती है!
हरे-भरे पेड़ों से ही तो,
फल-फूल सभी पाते हैं!
शान-बान-सम्मान तिरंगा,
मिलकर हम फहराते हैं!
बोलो, जय-जय भारत की,
सबको मिलकर रहना है!
तुम वाणी में ज़हर न घोलो,
याद यही तो रखना है!
— डॉ. सतीश चन्द्र भगत
(बनौली, दरभंगा, बिहार)