बताईं उधो जी! (भोजपुरी पद्य) - भगवती प्रसाद द्विवेदी

मए गोपी रोकि लिहली गोकुल के रहिया,
बताईं उधो जी! कान्हा खुद अइहें कहिया?

कइके पिरितिया बनवले विरहिनिया,
दिन में ना चैन परे, रात में ना निंदिया,
अपने परइले करेजा कइके घहिया,
बताईं उधो जी! कान्हा खुद अइहें कहिया?

कान्हा बिना लागेले जिनिगिया अकारथ,
तलफींले, जइसे बुझाला केहू जारत,
कतना बयान करीं आपन तबहिया!
बताईं उधो जी! कान्हा खुद अइहें कहिया?

का लिखले बाड़े, देखाईं तनी पतिया,
का उहवाँ करेलन हमनी के बतिया?
अइहें का तब, चलि जाई जान जहिया!
बताईं उधो जी! कान्हा खुद अइहें कहिया?

कब मिली सुने के बँसुरी के तानवा?
आइके प्रभु जी दिहें कब दरसनवा?
के अब चोराई इहाँ माखन-दहिया?
बताईं उधो जी! कान्हा खुद अइहें कहिया?

पढ़नीं जा प्यार के अढ़ाई अछरिया,
कान्हा बिना भइनीं जा जलबिन मछरिया,
कहवाँ हेराइल नेहिया के खाता-बहिया?
बताईं उधो जी! कान्हा खुद अइहें कहिया?

सगुन आ निरगुन के भेद ना बुझाला,
रमल बाड़े तन-मन में बस मुरलीवाला,
देखलाईं मत ज्ञान के गूढ़ रहिया,
बताईं उधो जी! कान्हा खुद अइहें कहिया?

चिरई-चुरुंग, गाय, गोपी, गोपाल में,
बनवारी बसेले हिया के सुर-ताल में,
पार करिहें भगवती के धइके ऊ बँहिया,
बताईं उधो जी! कान्हा खुद अइहें कहिया?


- भगवती प्रसाद द्विवेदी
सर्जना, सृजनशील कालोनी, बिस्कुट फैक्ट्री रोड, निकट मगध आईटीआई, नासरीगंज,
दानापुर, पटना -८०१ ५०३(बिहार)
ईमेल dubeybhagwati123@gmail.com




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