प्रदूषण के जे हाल हए - बशिष्ठ राय बशिष्ठ

प्रदूषण के जे हाल हए,
स्वस्थ जीवन बेहाल हए।
पेड़ पौधा सुख रहल हऽ,
जीवन जीना मुहाल हए।
स्वच्छ प्रकृति के सुंदर रूप में,
प्रदूषण के काला धुआं,
जबरन कब्जा जमा रहल हऽ,
चारों ओर सिग्नल लाले लाल हए,
जीवन जीना मुहाल हए।
जल में कचरा पसरल हए,
थल में पालीथीन सड़ रहल।
आकाश में धुआं उड़इअऽ,
ध्वनि में डी जे के झंकार हए,
जीवन जीना मुहाल हए।
भौतिक प्रदूषण से प्रकृति डरल,
वैचारिक प्रदूषण से मानवता मरल,
धार्मिक प्रदूषण लील रहल हय धरम के,
प्रदूषण के जनमदाता माला माल हए,
जीवन जीना मुहाल हए।
पेड़ प्राण है जहां के,
इ जान है धरा के,
मत काटू एकरा,
इ तऽ धरती के लाल हए,
जीवन जीना मुहाल हए।


                -बशिष्ठ राय बशिष्ठ,
                 शाहपुर पटोरी (समस्तीपुर)

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