रुकल हमर गौना हए (बज्जिका गीत) — डॉ. विद्या चौधरी


आएल असाढ़ महीना,
दूर जो न कोरोना,
रुकल हमर गौना हए।

पिया जे अइतन बोलाबै,
डोलिया फना के,
सजन घर जाना हए।
आएल असाढ़ महीना,
दूर जो न कोरोना,
रुकल हमर गौना हए।

बाबूजी सीसो कटबैलन,
चच्चाजी चीरबैलन,
पलंग बनवाना हए।
आएल असाढ़ महीना,
दूर जो न कोरोना,
रुकल हमर गौना हए।

भइया से कहिअउन हे भउजी,
बरही बोलबैतन,
पलंग बनबैतन,
सजन घर जाना हए।
आएल असाढ़ महीना,
दूर जो न कोरोना,
रुकल हमर गौना हए।


- डॉ. विद्या चौधरी 
     पटना, बिहार 


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