सबकी प्यास बुझाओ बादल (बाल कविता) - डॉ. सतीश चन्द्र भगत


इंतज़ार में गोनू काका,
खेतों में केवल धूल उड़े।
बीज नहीं बोए अब तक वे,
उमड़-घुमड़ कर आओ बादल!

सूख रही बाबा की बगिया,
खूब झमाझम बरसो बादल!
सब खेतों में पानी भर दो,
सबका मन हर्षाओ बादल!

झुलस गए पेड़ों के पत्ते,
सूख गईं सब ताल-तलैया।
सब लगते कितने उदास हैं,
सबकी जान बचाओ बादल!

व्याकुल होकर रोते हैं सब—
कुत्ते, बिल्ली, चुनमुन चिरई।
आओ-आओ जल्दी आओ,
सबकी प्यास बुझाओ बादल!

— डॉ. सतीश चन्द्र भगत
(बनौली, दरभंगा, बिहार)

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