सावन का यह मस्त महीना,
खुशियाँ लाया अपार।
अमर प्रेम का बंधन राखी,
भाई-बहन का प्यार।
रोली, चंदन, दीप, मिठाई,
राखी करे इंतज़ार।
'मेरे भैया कब आओगे?'
बहन खड़ी है द्वार।
आए भैया, खुश है रेखा,
चंदन-रोली लगाई।
बाँधी राखी जब भैया को,
मुँह में डाली मिठाई।
अब घर के लोग सभी हैं खुश,
खाकर खूब मिठाई।
खेलें-कूदें खुशी-खुशी सब,
जब राखी है आई!
- डॉ. सतीश चन्द्र भगत
बनौली, दरभंगा (बिहार)-847428